कभी कभी हम सोचते है की हम जो कर रहे है वह सही है हमे किसी की जरूरत ही नहीं है हम सबसे अलग है पर हम ये भूल जाते है की हम गलत भी हो सकते है हर टाइम हम सही नहीं हो सकते है कभी गलत भी होते है पर क्या करे हमारे अंदर जो मैं होता है न वह हमे अहम् के चरम पर ले ही जाता है अगर एक बार हमारे अंदर मै अ जाये जो फिर वोह हमे और ऊपर और ऊपर लेता जायेगा हमारे सोचने की शक्ति ही कम कर देगा लेकिन जब तक हम सोचते है तब तक इतनी देर हो जाती है की हम चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते है फिर तो यही होता है की काश मैंने पहले सोचा होता तो आज ऐसा न होता हम भूल जाते है की जैसा बीज बोया है वैसा ही पेड़ उगेगा फिर चाहे वह फल का हो या काटो का मिलेगा तो हमेहि न इसलिए अगर हम कुछ भी करते है तो पहले उसे बहुत सोच समझ कर ही करना चाहिए की जो काम हम कर रहे है उसका परीनाम क्या होगा।
No comments:
Post a Comment