कभी कभी हम सोचते है की हम जो कर रहे है वह सही है हमे किसी की जरूरत ही नहीं है हम सबसे अलग है पर हम ये भूल जाते है की हम गलत भी हो सकते है हर टाइम हम सही नहीं हो सकते है कभी गलत भी होते है पर क्या करे हमारे अंदर जो मैं होता है न वह हमे अहम् के चरम पर ले ही जाता है अगर एक बार हमारे अंदर मै अ जाये जो फिर वोह हमे और ऊपर और ऊपर लेता जायेगा हमारे सोचने की शक्ति ही कम कर देगा लेकिन जब तक हम सोचते है तब तक इतनी देर हो जाती है की हम चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते है फिर तो यही होता है की काश मैंने पहले सोचा होता तो आज ऐसा न होता हम भूल जाते है की जैसा बीज बोया है वैसा ही पेड़ उगेगा फिर चाहे वह फल का हो या काटो का मिलेगा तो हमेहि न इसलिए अगर हम कुछ भी करते है तो पहले उसे बहुत सोच समझ कर ही करना चाहिए की जो काम हम कर रहे है उसका परीनाम क्या होगा।
Wednesday, November 14, 2018
Tuesday, December 23, 2014
Monday, December 15, 2014
एक लड़की
मै हमेसा की तरह की आज सड़क पर अपनी साइकिल चला के जा रहा रहा था अपनी ही मस्ती में खोया था बस तभी रोड के दुसरे किनारे पर एक छोटी सी लड़की जिसको मई जानता नहीं था उसकी उम्र करीव 10 साल की रंग सावला था कपड़ो में कुरता पहने हुए थी कमर में अपने छोटे भाई को दवाए हुए खुसी से खड़ी हुयी हलकी से हसी लिए हुए मै खड़ा उसको देख रहा था बेचारी मई उसके पास गया और मैंने उससे पूछा की बेटा तुम्हारा नाम क्या है उसने मुझे बताया की उसका नाम रीता है मैंने उससे पूछा की तुम्हारे माता पिता काहा है और तुम यहाँ रोड पर क्या कर रही हो एक छोटे से लड़के को लेकर और तुम स्कूल नहीं जाती हो क्या पहले तो वोह कुछ नहीं बोली लेकिन बाद में मैने फिर वही पूछा तो फिर वोह बोली भैया अम्मा तो हमारी घर मई जाई के बर्तन मजती है और दद्दा हमारे ठेली लागौत है जाऊ हमारो छोटो भैया है अब घर मई हम और हमारो जाऊ भैया ही रह जात है जय कोई देखन वालो नै है हम स्कूल जाती तो हातीं कच्छा ३ तक पड़ी फिर जब भैया ई गौ तब अम्मा ने स्कूल बंद करवाई दौ की घर मई जय कौन दिखिए ताबाहि हमने स्कूल जैबयो बंद कर दो और अब रोड पर आइके जाई गाडी देकवे को लाई है इतना कह कर वोह चली गयी जव मैंने उसके मुह से ये बात सुनी तो बड़ा ही अजीव लगा आज भी हमारे देश में गरीबी के कारण बहुत से बच्चे पढ्याई नहीं कर पाते है जिसके कारण वोह बेचारे छोटी से ही उम्र के काम करने लगते है और अपना बचपन बस काम में ही खो देते है ये बच्चे ही हमारा भबिस्य होते है अगर हम अपने वर्तमान को सही नहीं बनायेंगे तो भबिस्य का निर्माण नहीं कर पायेगे
Monday, November 24, 2014
मेरे ब्लॉग में स्वागत है मै ये ब्लॉग अपने दोस्तों को समर्पित कर रहा हूँ क्यों की अपने दोस्तों के साथ रह कर मैंने बहुत से अच्छे पर देखे है मुझे ये पता चला की सच में दोस्तों के बिना जिंदगी अधूरी है तो ये मेरी पहली पोस्ट मेरे प्यारे दोस्तों के नाम मेरे प्यारे दोस्त प्रशांत भारती , अभिषेक सिंह , देव सिंह अगर मेरे ये दोस्त न होते तो मई बहुत अकेला हो जाता
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